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Saturday, July 14, 2012
Friday, July 13, 2012
Gomti Chakra and remedies
लाख परेशानियों का एक अचूक उपाय है ये- गोमती चक्र--Part-3
तंत्र शास्त्र के अंतर्गत तांत्रिक क्रियाओं में एक ऐसे पत्थर का उपयोग किया जाता है जो दिखने में बहुत ही साधारण होता है लेकिन इसका प्रभाव असाधारण होता है। इस पत्थर को गोमती चक्र कहते हैं। गोमती चक्रकम कीमत वाला एक ऐसा पत्थर है जो गोमती नदी में मिलता है। गोमती चक्र के साधारण तंत्र उपयोग इस प्रकार हैं-
- होली, दीवाली तथा नवरात्र आदि प्रमुख त्योहारों पर गोमती चक्र की विशेष पूजा की जाती है। अन्य विभिन्न मुहूर्तों के अवसर पर भी इनकी पूजा लाभदायक मानी जाती है।
- सर्वसिद्धि योग तथा रविपुष्य योग पर इनकी पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है।
- पेट संबंधी रोग होने पर 10 गोमती चक्र लेकर रात को पानी में डाल दें तथा सुबह उस पानी को पी लें। इससे पेट संबंध के विभिन्न रोग दूर हो जाते हैं।
- धन लाभ के लिए 11 गोमती चक्र अपने पूजा स्थान में रखें। उनके सामने श्री नम: का जप करें। इससे आप जो भी कार्य या व्यवसाय करते हैं उसमें बरकत होगी और आमदनी बढऩे लगेगी।
- गोमती चक्रों को यदि चांदी अथवा किसी अन्य धातु की डिब्बी में सिंदूर तथा चावल डालकर रखें तो ये शीघ्र शुभ फल देते हैं।
तंत्र शास्त्र के अंतर्गत तांत्रिक क्रियाओं में एक ऐसे पत्थर का उपयोग किया जाता है जो दिखने में बहुत ही साधारण होता है लेकिन इसका प्रभाव असाधारण होता है। इस पत्थर को गोमती चक्र कहते हैं। गोमती चक्रकम कीमत वाला एक ऐसा पत्थर है जो गोमती नदी में मिलता है। गोमती चक्र के साधारण तंत्र उपयोग इस प्रकार हैं-
- होली, दीवाली तथा नवरात्र आदि प्रमुख त्योहारों पर गोमती चक्र की विशेष पूजा की जाती है। अन्य विभिन्न मुहूर्तों के अवसर पर भी इनकी पूजा लाभदायक मानी जाती है।
- सर्वसिद्धि योग तथा रविपुष्य योग पर इनकी पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है।
- पेट संबंधी रोग होने पर 10 गोमती चक्र लेकर रात को पानी में डाल दें तथा सुबह उस पानी को पी लें। इससे पेट संबंध के विभिन्न रोग दूर हो जाते हैं।
- धन लाभ के लिए 11 गोमती चक्र अपने पूजा स्थान में रखें। उनके सामने श्री नम: का जप करें। इससे आप जो भी कार्य या व्यवसाय करते हैं उसमें बरकत होगी और आमदनी बढऩे लगेगी।
- गोमती चक्रों को यदि चांदी अथवा किसी अन्य धातु की डिब्बी में सिंदूर तथा चावल डालकर रखें तो ये शीघ्र शुभ फल देते हैं।
Thanking You,
Regards,
Vijay Goel
Jaipur
Astrologer and Vastu Counselor,
Mob : 8003004666
email : goelvj@gmail.com
www.vijaygoel.com-----
Thursday, June 14, 2012
Shukar Kavach
SHUKRA (VENUS) KAVACH
DHYAN.
मृणालकुन्देन्दुपयोजसुप्रभं
पीताम्बरं प्रसृतमक्षमालिनम् ।
समस्तशास्त्रार्थविधिं महान्तं
ध्यायेत्कविं वाञ्छितमर्थसिद्धये ॥ 1 ॥
अथ शुक्रकवचम्
शिरो मे भार्गवः पातु भालं पातु ग्रहाधिपः ।
नेत्रे दैत्यगुरुः पातु श्रोत्रे मे चन्दनद्युतिः ॥ 2 ॥
पातु मे नासिकां काव्यो वदनं दैत्यवन्दितः ।
वचनं चोशनाः पातु कण्ठं श्रीकण्ठभक्तिमान् ॥ 3 ॥
भुजौ तेजोनिधिः पातु कुक्षिं पातु मनोव्रजः ।
नाभिं भृगुसुतः पातु मध्यं पातु महीप्रियः ॥ 4 ॥
कटिं मे पातु विश्वात्मा उरू मे सुरपूजितः ।
जानुं जाड्यहरः पातु जङ्घे ज्ञानवतां वरः ॥ 5 ॥
गुल्फौ गुणनिधिः पातु पातु पादौ वराम्बरः ।
सर्वाण्यङ्गानि मे पातु स्वर्णमालापरिष्कृतः ॥ 6 ॥
फलश्रुतिः
य इदं कवचं दिव्यं पठति श्रद्धयान्वितः ।
न तस्य जायते पीडा भार्गवस्य प्रसादतः ॥ 7 ॥
॥ इति श्रीब्रह्माण्डपुराणे शुक्रकवचं सम्पूर्णम् ॥
Best Wishes,
Vijay Goel
IndianAstroVedic.com
goelvj@gmail.com
http://www.lalkitab1952.blogspot.com/
http://vjgoel.blogspot.com/
Friday, May 11, 2012
Winning Legal fight Doha from Guru Granth Sahib
This passage has to be
recited 108 times after the reading of the Japji Sahib & completed
in the early morning (before sunrise & before dawn light starts)
continuously for a period of 40 days. It is good if you keep some water
in a copper lota & sprinkle it in
the house as well as drink from it on the 40th day. Take care that the
water does not dry up during the period that it is being recited. If it
does, keep refilling. Of course, there are other passages with similar
effect in the Guru Granth Sahib too.
The sound of these shlokas has been rendered in Gurmukhi & it is best to learn the shloka you desire to read from the priest in the nearby Gurudwara. This way the flow & accent of the verse can be easily grasped. Also, the shlokas need to be recited after the full recitation of the 5 prayers given for the Sikhs early in the morning. In the least, the Japji Sahib should definitely be recited before reciting this verse 108 times. Water is to be kept in a copper vessel to sprinkle in the residence/ office area as per purpose of verse. In addition, this water is to be offered to those who seek to derive benefit from this verse. The verse has to repeated at a fixed time & finished before sunrise as well as before light of dawn daily for 40 days without a gap at the same place. Reciting at the banks of a river (as in the case of a mantra) or at a holy place multiplies the effects further.
Thank you,
Best Wishes,
Best Wishes,
Vijay Goel
Jyotish Visharad (ICAS) B.sc, MBA
Astrologer and Vastu Counselor,
mob:+91 9214502239
Financial prosperity doha from Guru Granth Sahib
This passage has to be
recited 108 times after the reading of the Japji Sahib & completed
in the early morning (before sunrise & before dawn light starts)
continuously for a period of 40 days. It is good if you keep some water
in a copper lota & sprinkle it in
the house as well as drink from it on the 40th day. Take care that the
water does not dry up during the period that it is being recited. If it
does, keep refilling. Of course, there are other passages with similar
effect in the Guru Granth Sahib too.
Thank you,
Best Wishes,
Best Wishes,
Vijay Goel
Jyotish Visharad (ICAS) B.sc, MBA
Astrologer and Vastu Counselor,
mob:+91 9214502239
Wednesday, April 25, 2012
Dont eat two opposite things together
१)अंगूर के साथ शहद का प्रयोग नही करना चाहिए ,नहीं तो पेट दर्द हो सकता है |
२)दही और पनीर का प्रयोग भी एक साथ करना अच्छा नही होता |
३)शहद के साथ खरबूजा और मूली नहीं खानी चाहिए |
४)घी और तेल को एक साथ मिला कर न इस्तेमाल करें
५)दही के साथ अंडा और इमली के प्रयोग से बचना चाहिए |
६)दूध के साथ किसी प्रकार की खटाई का इस्तेमाल न करें |
७)मछली खाने के बाद दूध ,शहद या गन्ने का रस पीना नुकसान दे होता है |
८)शहद और घी कभी भी सम मात्रा में नही खाने चाहिए|
९)खरबूजे के सेवन के बाद या साथ में दही खाना काफ़ी नुकसान देता है |
१०)खटाई खाने के तुरन्त बाद लस्सी या शरबत नहीं पीना चाहिए |
इस तरह छोटी छोटी बातों का ध्यान रख कर स्वस्थ रहा जा सकता |
Tuesday, April 24, 2012
Akshaya Tritiya अक्षय तृतीया
अक्षय
तृतीया या आखा तीज वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को कहते हैं।
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका
अक्षय फल मिलता है।अक्षय का अर्थ है कभी न क्षय समाप्त होने वाला।
सम्पूर्णं कामनाओं को प्रदान करने वाला यह व्रत वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की
तृतीया को किया जाता है यदि यह तृतीया रोहिणी नक्षण से युक्त हो तो विशेष
रूप से पूज्य मानी जाती है।भविष्य पुराण के अनुसार इस तिथि की युगादि
तिथियों में गणना होती है, सतयुग और त्रेता युग का प्रारंभ इसी तिथि से हुआ
है। भगवान विष्णु ने नर-नारायण, हयग्रीव और परशुराम जी का अवतरण भी इसी
तिथि को हुआ था। ब्रह्माजी के पुत्र अक्षय कुमार का आविर्भाव भी इसी दिन
हुआ था। इस दिन श्रीबद्रीनाथ जी की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जाती है और
श्री लक्ष्मी नारायण-लक्ष्मी नारायण के दर्शन किए जाते हैं। प्रसिद्ध तीर्थ
स्थल बद्रीनारायण के कपाट भी इसी तिथि से ही पुनः खुलते हैं।इस दिन दिया
गया दान, किया हुआ हवन और जप सभी अक्षय बतलाये गये हैं। जो स्त्री सब
प्रकार के सुख चाहती है उन्हें यह व्रत अवश्य करना चाहिए। यह व्रत करके
स्त्री अखण्ड सौभाग्यवती होती है, इस व्रत अनुष्ठान करने वाले की संतान
अक्षय हो जाती है और की हुई कामना पूर्ण होती है। अक्षय तृतीया के दिन की
गई साधना व पूजा का फल कभी कम नहीं होता इसलिए इसे बहुत ही शुभ दिन माना
जाता है :-
1. आपके पास धन की कोई कमी न हो :- मंत्र- ऊँ ऐं
ह्रीं श्रीं क्लीं दारिद्रय विनाशके जगत्प्रसूत्यै नम:।। अक्षय तृतीया के
दिन यह प्रयोग प्रारंभ करें। इसके बाद प्रतिदिन अपनी इच्छानुसार इस मंत्र
का जप करें। जप के लिए कमलगट्टे की माला का उपयोग करें। माला जपते समय
सामने देवी लक्ष्मी का चित्र तथा शुद्ध घी का दीपक जलते रहना चाहिए। 12
लाख मंत्र जप होने पर यह मंत्र सिद्ध हो जाता है।
2. विवादों से परेशान है : - मंत्र
सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धन-धान्य सुतान्वित:।
मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय:।।
अक्षय तृतीया रात्रि में पूजन के कमरे काली मां की मूर्ति या चित्र
स्थापित करें। अपने सामने बाजोट पर सफेद वस्त्र बिछाकर काली यंत्र स्थापित
करें। चित्र एवं यंत्र पर लाल फूल चढ़ाएं। यंत्र का पूजन करें। रात्रि में
10 बजे बाद 108 बार(एक माला) स्फटिक माला से इस मंत्र का जप करें। इस दौरान
दीपक व अगरबत्ती जलती रहना चाहिए। इस क्रिया को तीन दिन तक इसी प्रकार
दोहराएं। साधना समाप्ति के बाद मां काली से विवाद मुक्ति के लिए प्रार्थना
करें।
3. धन प्राप्ति के लिए : - माता लक्ष्मी जी की प्रतिमा या
चित्र को ताम्बे की बड़ी थाली में स्थापित कर पूजना चाहिए, देवी को धूप
दीप, नवैद्य,पंचामृत व दक्षिणा अर्पित करें, उत्तर दिशा की ओर मुख रख कर
मंत्र का जाप करें, 9 माला मंत्र जाप करें या विशेष इच्छाओं हेतु 21 माला
करनी चाहिए, लाल रंग के आसन पर बैठ कर ही जाप करें, खीर का प्रसाद चढ़ाएं व
बाँटें, देवी को नारियल व पुष्प माला अर्पित करें ।
मंत्र-ॐ ह्रीं श्रीं ह्रीं श्रीं कमालात्मिके स्वाहा: ।
4. बिमारियों से मुक्ति : - अक्षय तृतीया को माँ पार्वती जी की पूजा करनी
चाहिए, देवी को लाल चुनरी चढ़ाएं,पान, लौंग,इलायची आदि अर्पित करें, उत्तर
दिशा की ओर मुख रख कर मंत्र का जाप करें, 11 माला करनी चाहिए, लाल रंग के
आसन पर बैठ कर ही जाप करें, फलों का प्रसाद अर्पित करें, कमल के या कनेर के
फूल अर्पित करें ।
मंत्र - ॐ श्रीं अष्टचक्र नायिके स्वाहा: ।
5. कभी न होगी पैसे की कमी : - अक्षय तृतीया की रात को साधक शुद्धता के
साथ स्नान कर पीली धोती धारण करे और एक आसन पर उत्तर की ओर मुंह करके बैठ
जाएं तथा सामने सिद्ध लक्ष्मी यंत्र को स्थापित करें जो विष्णु मंत्र से
सिद्ध हो और स्फटिक माला से निम्न मंत्र का 21 माला जप करें। मंत्र जप के
बीच उठे नहीं ।
मंत्र - ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं ऐं ह्रीं श्रीं फट्
-------
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Best Wishes,
Vijay Goel
Vedic Astrologer and Vastu Consultant,
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